Social

Just another Jagranjunction Blogs weblog

39 Posts

6 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 23102 postid : 1124430

अन्याय जीत गया हम हार गये ......

Posted On: 21 Dec, 2015 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्याय जीत गया हम हार गये ………

16 दिसम्बर 2012 को देश की राजधानी दिल्ली के  चलती बस में मानवता की सारी हदों को पार करते हुए निर्भया के साथ  जो कांड हुआ था  उससे लोगो के रोंगटे खड़े हो गये । निर्भया कांड में न्याय की मांग के लिए सारा देश उबल पड़ा था ,सड़को से  सदन तक न्याय की मांग उठने लगी थी लेकिन 20 दिसम्बर 2015 को निर्भया कांड का एक दोषी बालिग नही होने की वजह से सधार गृह से रिहा कर किसी गेर सरकारी संस्था को सोंप दिया गया ।रिहाई की घटना ने जेसे तीन साल पहले के जख्म को फिर से हरा कर दिया । पुलिस जाँच के क्रम में यह बात सामने आई थी कि नाबालिग अपराधी की दरिंदगी की वजह से ही निर्भया को अपनी जान गवानी पड़ी थी ।पांच दोषियों में से एक ने आत्महत्या कर ली ,एक बालिग नही होने की वजह से रिहा कर दिया गया और बाकी अभी जेल की सलाखों के पीछे मोत की सजा का इंतजार कर रहे हैं । रविवार को रिहा नाबालिग घटना के समय 18 वर्ष व्यस्क  की उम्र सीमा से महज 6 महीने कम था जिसकी वजह से उस पर ना तो सामान्य अदालत में मुकदमा चल सकता था ना ही जेल में रखा जा सकता था । बालिग नही होने की वजह से उसपर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में मुकदमा चला और कानून में प्रस्तावित अधिकतम तीन साल तक सुधार गृह में रखने की सजा सुनाई गयी थी । तीन साल पूरा होने के बाद रविवार को  नाबालिग की रिहाई के बाद एक बार फिर लोग न्याय की मांग के लिए सडको पर उतर आये हैं और हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं कानूनविद के अनुसार कानून में उल्लेख सजा से अधिक अवधि की सजा अदालत नही सुना सकती ।
।निर्भया कांड के बाद जुवेनाइल एक्ट में संसोधन को लेकर बात की गयी ।महिला आयोग ,गेर सरकारी संस्था ,बुद्धिजीवी तथा आम जन सभी ने एक स्वर में एक्ट में संसोधन की बात की तथा नाबालिग की तय उम्र सीमा 18 से घटाकर 16 किये जाने की मांग की ।बाल विकाश विभाग ने संसद में संसोधित बिल पेश कर दिया तथा लोकसभा में विधेयक पास होने के बाद आज भी राज्य सभा में विधेयक लटका हुआ है । संसोधित जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में सीधे तोर पर तो नाबालिग की उम्र नही घटाई गयी लेकिन गंभीर अपराध जेसे हत्या ,बलात्कार में शामिल 16 से 18 वर्ष के अवयस्क को दण्डित किया जा सकता है । क़ानूनी कवायद और राजनेताओ की निष्क्रियता की वजह से आज एक अपराधी कड़ी सजा से बाच गया अगर राज्य सभा में विधेयक पारित हो जाता तो न्याय पर अन्याय विजयी नही होता ।
कानून में अधिकतम 3 साल की सजा होने के कारन एक अपराधी जघन्य अपराध करने के बावजूद कड़ी सजा से बच गया ।अगर समय रहते संसोधित कानून राज्य सभा में पास नही हुआ तो निर्भया कांड जेसी बड़ी बड़ी गुनाहों में गुनाहगार बचते रहेंगे और आम जन सडको पर चिल्लाते रहेंगे ।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

3 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
December 21, 2015

जय श्री राम ये दिखता है की हमारे राज्य सभा सांसद देश और जनता की समस्यों के प्रति कितने जागरूक है नहीं तो ये बिल राज्य सभा में पास हो जाता कांग्रेस तो केवल गांधी परिवार की फिकर करती है देश में सूख पड़े,किसान मरे बाढ़ से लोग त्रस्त हो या पंजाब में आतंकी हमला हो उन्हें इस पर बहस से मतलब नहीं केवल अदालत के सम्मान या किसी बहाने सदन की कार्यवाही वाधित करो इस मामले में राज्य सभा को कोसना चाइये अच्छा लेख

atul61 के द्वारा
December 23, 2015

राज्य सभा में कल बिना किसी चर्चा के किशोर न्याय विधेयक पास हो गया Iक्या विधेयक सम्पूर्ण है जो चर्चा आवश्यक नहीं थी I क्या विधेयक पास हो जाने भर से नाबालिग अपराध की दुनिया से दूर चले जायेंगे I नाबालिग किशोर गलत रास्ते पर न जायें इसके लिए समाज को सशक्त पहल करनी होगी I दंड, कितना भी कड़ा दे दिया जाये, यह सुनिसचित नहीं करता कि भविष्य में अपराध नहीं होंगे I मैं आप से अनुरोध करूँगा कि मेरा ब्लॉग कानून ,समाज व राजनीतक प्रभाव भी जरूर पढ़ें

sadguruji के द्वारा
December 29, 2015

आदरणीय प्रताप तिवारी जी ! बहुत विचारणीय लेख ! राजयसभा में कानून पास हुआ ! इस जाते वर्ष की यही विशेष बात है ! नववर्ष की बहुत बहुत बधाई !


topic of the week



latest from jagran